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Pradhan Pravasi
Gorakhpur•26 days ago

बाढ़ में अधूरा पुल बना ग्रामीणों के लिए आफत पीपीगंज-भक्शा मार्ग पर

बाढ़ में अधूरा पुल बना ग्रामीणों के लिए आफत पीपीगंज-भक्शा मार्ग पर

बाढ़ में अधूरा पुल बना ग्रामीणों के लिए आफत पीपीगंज-भक्शा मार्ग पर जान जोखिम में डालकर गहरे पानी से गुजर रहे हजारों लोग, निर्माण की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल सहजनवा गोरखपुर। सहजनवा तहसील के पाली ब्लॉक क्षेत्र के पीपीगंज-भक्शा मार्ग पर वर्षों से क्षतिग्रस्त पुल का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं होने से बाढ़ के दौरान ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुल के अधूरे निर्माण और सड़क पर भरे गहरे पानी के बीच आसपास के सैकड़ों गांवों के हजारों लोगों को रोजाना जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जरूरी काम से निकलने वाले ग्रामीणों के सामने सुरक्षित रास्ते का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की बदहाल स्थिति लंबे समय से बनी हुई थी। निर्माण कार्य समय रहते पूरा हो जाता तो बरसात और बाढ़ के मौसम में लोगों को इस तरह जोखिम उठाकर आवागमन नहीं करना पड़ता। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में देरी को लेकर संबंधित ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। गहरे पानी के बीच सफर बनी मजबूरी पीपीगंज-भक्शा मार्ग आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, विद्यार्थी, किसान और नौकरी-पेशा लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। वर्तमान में बाढ़ के पानी के कारण मार्ग की स्थिति और अधिक खराब हो गई है। लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि बरसात से पहले निर्माण कार्य को प्राथमिकता देते हुए पूरा करा दिया गया होता तो वर्तमान संकट से बचा जा सकता था। उनका कहना है कि निर्माण में देरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। बाढ़ के बाद बढ़ा खतरा बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ही अधूरे पुल के आसपास खतरा और बढ़ गया है। गहराई का सही अंदाजा नहीं होने के कारण राहगीरों को दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय विभाग को पहले ही सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए। ठेकेदार से लेकर विभागीय जिम्मेदारों तक सवाल पुल निर्माण में देरी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर निर्माण कार्य समय से पूरा क्यों नहीं कराया गया? क्या विभागीय स्तर पर निर्माण कार्य की नियमित निगरानी हुई? बरसात से पहले काम पूरा कराने की कोई प्रभावी कार्ययोजना थी या नहीं? यदि निर्माण कार्य समय से पूरा नहीं हो सका तो इसके लिए जवाबदेही किसकी तय होगी? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेते हुए अधूरे पुल का निर्माण शीघ्र पूरा कराने, आवागमन के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने और निर्माण में देरी की जांच कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक करता है या फिर लोगों को इसी तरह बाढ़ के पानी के बीच जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा।

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