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Pradhan Pravasi
Gorakhpur•24 days ago

प डॉ. विकास कुमार को मिला आठवां डिजाइन पेटेंट ‘स्मार्ट एलपीजी गैस

प डॉ. विकास कुमार को मिला आठवां डिजाइन पेटेंट ‘स्मार्ट एलपीजी गैस

प डॉ. विकास कुमार को मिला आठवां डिजाइन पेटेंट ‘स्मार्ट एलपीजी गैस रिसाव पहचान उपकरण’ से घरेलू एवं ग्रामीण परिवारों की सुरक्षा में मिलेगी सहायता सहजनवा गोरखपुर। कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गीडा, गोरखपुर के यांत्रिक अभियंत्रण विभाग में सहायक आचार्य डॉ. विकास कुमार ने अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने उनके डिजाइन ‘स्मार्ट एलपीजी गैस रिसाव पहचान उपकरण’ को पंजीकृत किया है। यह उनका आठवां डिजाइन पेटेंट है। इस डिजाइन का डिजाइन क्रमांक 483456-001 है तथा इसे डिजाइन अधिनियम, 2000 एवं डिजाइन नियम, 2001 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है। डॉ. विकास कुमार के अनुसार, इस उपकरण का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस के रिसाव की पहचान में सहायता करना है। गैस रिसाव की समय पर पहचान न होने से आग लगने एवं दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में यह उपकरण विशेष रूप से ग्रामीण परिवारों एवं घरेलू उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में उपयोगी हो सकता है। डॉ. कुमार ने कहा, “अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान करे और आम लोगों के जीवन को सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाए।” उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार, गुरुजनों, शोध निर्देशक, संस्थान के प्रबंधन, सहकर्मियों एवं विद्यार्थियों के सहयोग और आशीर्वाद को दिया। उन्होंने अपनी माता श्रीमती आशा देवी, भाई श्री विवेक कुमार, बहनों कुमारी साधना एवं कुमारी मृदुल तथा पत्नी श्रीमती ज्योति कुमारी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। डॉ. कुमार ने अपने प्रारंभिक शैक्षणिक संस्थान जयपाली देवी इंटरमीडिएट कॉलेज, दिव्य नगर, खोराबार, गोरखपुर के निदेशक श्री जगदीश प्रसाद एवं प्रधानाचार्य श्री राजेश कुमार सिंह, शोध निर्देशक डॉ. धीरेन्द्र सिंह, तथा संस्थान के अध्यक्ष श्री आर. डी. सिंह एवं निदेशक श्री मोहम्मद जाहिद रियाज खान के प्रति भी आभार व्यक्त किया। डॉ. विकास कुमार ने कहा कि वे भविष्य में भी ग्रामीण परिवारों, सामान्य जन और देशहित से जुड़े उपयोगी तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।

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