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नवरात्रि के पहले दिन धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश नाकाम; हिंदू संगठन

नवरात्रि के पहले दिन धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश नाकाम; हिंदू संगठन

नवरात्रि के पहले दिन धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश नाकाम; हिंदू संगठन की सक्रियता से पुलिस जांच में जुटी सुल्तानपुर (अखंडनगर): उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के अखंडनगर थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ नवरात्रि के पावन प्रथम दिन पर एक सोची-समझी साजिश के तहत भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन देकर अवैध रूप से ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पदाधिकारियों की मुस्तैदी के चलते इस बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया। 100 से 150 ग्रामीणों को किया गया था एकत्रित प्राप्त जानकारी के अनुसार, अखंडनगर के ग्राम डडवा की बगिया (नरवारी) में एक पूर्व-नियोजित कार्यक्रम के तहत लगभग 100 से 150 हिंदू समुदाय के लोगों को इकट्ठा किया गया था। आरोप है कि मुख्य आरोपी हरिश्चंद्र निषाद (निवासी: ग्राम नरवारी) और उसके दो सहयोगियों—विमला (निवासी: हाजीपुर, अलीमुद्दीनपुर) तथा कुछ अन्य अज्ञात साथियों द्वारा वहाँ पहुंचे ग्रामीणों को झाड़-फूंक, घरेलू बीमारियों के इलाज और पैसों का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए विवश व प्रेरित किया जा रहा था। मौके पर मौजूद लोगों को उनकी धार्मिक पुस्तकें दिखाकर सनातन धर्म छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। विहिप पदाधिकारियों ने दी पुलिस को तहरीर इस पूरी अवैध गतिविधि की भनक लगते ही स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने तुरंत इसकी सूचना विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड अध्यक्ष प्रमोद सिंह को दी। प्रमोद सिंह, शत्रुघ्न प्रसाद, राममूर्ति और अन्य ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला, जो इस पूरी घटना के चश्मदीद गवाह भी हैं। विहिप के प्रखंड अध्यक्ष प्रमोद सिंह ने अखंडनगर थाना प्रभारी को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि इस कृत्य से न केवल सनातन धर्म की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है, बल्कि क्षेत्र का सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और शांति व्यवस्था भंग होने का भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अवैध धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत FIR की मांग शिकायतकर्ता ने अवगत कराया है कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत यह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। पत्र के माध्यम से पुलिस प्रशासन से विनम्र निवेदन किया गया है कि मुख्य आरोपी हरिश्चंद्र निषाद और उसकी सहयोगी विमला समेत सभी सह-आरोपियों के खिलाफ सुसंगत कानूनी धाराओं (अवैध धार्मिक अधिनियम) के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इस मामले में शत्रुघ्न सिंह और राममूर्ति विश्वकर्मा (जिला समरसता प्रमुख) ने बतौर चश्मदीद गवाह अपने हस्ताक्षर किए हैं। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुट गई है।

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