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Gorakhpur•19 days ago

49वें वर्ष में प्रवेश करेगा वासूडिहा का रामलीला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, 12

49वें वर्ष में प्रवेश करेगा वासूडिहा का रामलीला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, 12

49वें वर्ष में प्रवेश करेगा वासूडिहा का रामलीला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, 12 अक्टूबर से होगा शुभारंभ पुरानी पीढ़ी की विरासत को नई पीढ़ी बढ़ा रही आगे, पांच दशक से कायम है धार्मिक आयोजन की परंपरा गगहा, गोरखपुर, बांसगांव संदेश। क्षेत्र के वासूडिहा (सिसायल) गांव में शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित होने वाला रामलीला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम इस वर्ष अपने 49वें वर्ष में प्रवेश करेगा। सोमवार, 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस आयोजन को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। करीब पांच दशक से निरंतर चली आ रही यह परंपरा गांव की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता की पहचान बन चुकी है। इस आयोजन की शुरुआत करने वाले युवा आज उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, जहां वे अपने अनुभवों से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहे हैं। कभी जिन युवाओं ने इस धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की नींव रखी थी, आज उनके प्रयासों का परिणाम है कि यह आयोजन अपनी निरंतरता बनाए हुए है। नई पीढ़ी भी पूरे उत्साह और समर्पण के साथ इस विरासत को आगे बढ़ाने में जुटी है। समिति के संयोजक छत्रपति सिंह ने कहा कि मां भगवती की महिमा और कृपा से गांव के पुराने कलाकार आज अपने जीवन में सफलता की गाथा लिख रहे हैं। रामलीला और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने के साथ समाज में पहचान बनाने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। रामलीला के मंचन के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सत्य और धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। वहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ गांव की गौरवशाली परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम को सफल बनाने में निर्मल सिंह, अखिलेश सिंह सन्नी, आदित्य सिंह, रविभूषण सिंह, श्याम कुमार सिंह, अजेंद्र सिंह और रणविजय सिंह सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीणों के सहयोग और सामूहिक सहभागिता से आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम क्षेत्र में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और आपसी भाईचारे का संदेश दे रहा है।

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